शुक्रवार, 6 सितंबर 2019

कद्दू की सब्जी कैसे बनाएं

हम कद्दू को कुम्हड़ा, कोरा, पेठा और काशीफल के नाम से भी जानते हैं। शायद  पीले रंग में पाई जाने वाली  यही इकलौती देसी सब्जी है। 
पीले रंग की खाद्य वस्तुओं जैसे आम, पपीता में विटामिन ए होता है वैसे ही कद्दू में भी विटामिन ए भरपूर मात्रा में होता है। साथ ही इसमें आयरन भी होता है। यह बाजार में बरसात के बाद अगस्त माह से बिकने आ जाता है। कद्दू बहुत सस्ते दामों में आसानी से मिल जाता है और शायद इसीलिए इसको हम कम पसन्द करते हैं।
चूंकि इस ब्लॉग का विषय ही "सादा भोजन" है इसलिए हम यहां इस सस्ती परंतु लाभकारी सब्जी के बारे में बात करते हैं। कद्दू दिखने में पीला, बड़ा सा गोल-मटोल व काटने पर इतना कठोर होता है कि सोचते हैं इसकी सब्जी पकने में तो घण्टों लग जाएंगे लेकिन बहनों ! नहीं यह काटते समय जितनी मेहनत मांगता है उतना ही यह पकते समय बिल्कुल भी समय नहीं लगाता।
तो आइए इसकी सब्जी बनाई जाए 👇

सामग्री चाहिए :-
कद्दू 250 ग्राम, हरी मिर्च, लाल मिर्च, हल्दी, छोंक के लिए तेल, राई, जीरा, चाहें तो मैथी दाना, नमक, हरा धनिया।

विधि :- 
कद्दू को छील कर छोटे टुकड़ों में काट लें। कढ़ाई में तेल डालें। गर्म होने पर राई, जीरे और मैथी दाने का छोंक लगाएं। कटी हरी मिर्च डालें। दो मिनट बाद कद्दू और सारे मसाले डालें। हल्का पानी छींटें और ढंक दें। पांच मिनट बाद कड़ाही खोलें। सब्जी तैयार है। ऊपर से हरा धनिया की पत्तियां डालें। कुछ बहनें इसमें शक्कर और नींबू का रस भी डालती हैं।

शनिवार, 20 जुलाई 2019

साबूदाने की खिचड़ी का स्वाद बढ़ाएं

साबूदाने की खिचड़ी बना रही हैं ? तो आइए मैं आपको इसे ज्यादा स्वादिष्ट बनाने की तरकीब बताती हूँ।
साबूदाने की खिचड़ी में एक महत्वपूर्ण सामग्री मूंगफली दाना होता है।  साबूदाने की खिचड़ी में मूंगफली दाने को जब आप सेंकें तो सेंकने में जल्दबाजी न करें। दानों को थोड़ा गहरा रंग आने तक सिंकाई करें। दाने अच्छी तरह से सिंकने की यही पहचान है कि सिंकने पर एकदम तेज महक आने लगती है। दाने कच्चे रहने पर खिचड़ी बेस्वाद लगेगी।



बुधवार, 17 जुलाई 2019

वाह ! कितनी सुंदर गिलकी है !!

बाजार में सब्जी खरीदने निकलो तो सब्जी बेचने वालों के पास तरह-तरह की सब्जियां सजी रहती हैं। कोई-कोई सब्जी तो इतनी बढ़िया ओर सुंदर होती है कि मन करता है,बस भाव-ताव कुछ न करें और फ़ौरन घर ले जाएं।
ऐसे ही आजकल बाजार में सब्जी-फल इतने आकर्षक रंग-रूप में आने लगे हैं कि मुंह से निकल पड़ता है : वाह ! क्या क्या बात है ? 
इसी तरह मार्केट में आजकल गिलकी अत्यधिक मात्रा में आ रही है।यह बात अलग है कि इसके दाम कम नहीं हो रहे हैं। और गिलकी भी देखते ही खरीदने की इच्छा हो उठती है।टोकरी में एक जैसी बराबर साइज की,चमकीली,पतली-पतली गिलकी देख कर कौन गृहिणी नहीं रिझेगी। लेकिन इनके इस आकर्षक रंग-रूप पर आप मत मोहित होइए। कृषि वैज्ञानिकों ने नए युग में  जैसे क्रांति ला दी है।केमिकल के प्रयोग से आज हर खाद्य वस्तु की पैदावार इतनी ज्यादा हो रही है कि आबादी बढ़ने के उपरांत भी आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। इन केमिकल के द्वारा पैदावार जहां ज्यादा होती है, वस्तु अधिक सुंदर व आकर्षक दिखती हैं,जिससे बाजार में किसान को उसके अच्छे दाम  मिल जाते हैं। पर यही केमिकल मनुष्य के शरीर में जा कर बीमारी को जन्म देंगे,ये तो एक साधारण इंसान भी समझ सकता है।
ये जो चमकदार,गहरी- हरी,पतली-पतली  गिलकी आपको दिख रही है ना,इसमें वो स्वाद नहीं है जो कम चमकदार,छोटी-बड़ी,मोटी-पतली गिलकी में होता है। आपको विश्वास न हो तो दोनों तरह की गिलकी की सब्जी बना कर चखिए। फर्क मालूम हो जाएगा। इसलिए आज से  सामान्य, मोटी-पतली छोटी-बड़ी गिलकी खा कर अनावश्यक बीमारी से बचिए।