गुरुवार, 26 मार्च 2026

प्याज का बेसन बनाने की सरलतम विधि

   


    प्याज का स्वादिष्ट बेसन बनाने के लिए हमें ज्यादा कुछ सामग्री नहीं चाहिए। जो जरूरी सामग्री हैं वो इस तरह हैं :~

1. बारीक कटी प्याज 1कटोरी

2. बेसन तीन कटोरी

3. खाने का तेल, सरसों, मूंगफली, सोया, जैसा भीं आप यूज करते हों।

4. हरी मिर्च बारीक कटी

5. लाल मिर्च पाउडर, नमक, हल्दी पाउडर, सुखा धनिया पाउडर

6. बघार के लिए हींग, राई और जीरा।

विधि - कढ़ाही में तेल डाल कर गर्म करे और राई, जीरे का छौंक लगाएं। हींग डालें और फिर कटी हरी मिर्च डालें। दो मिनट बाद कटे प्याज डाल कर भूनें। जन प्याज नर्म हो जाएं तब बेसन डाल कर अच्छे से मिलाएं। एक बर्नर पर दो कटोरी पानी गर्म होने रखें। बेसन और प्याज को अच्छे से भूनें।

अब गर्म पानी डाल दें और अच्छे से मिलाएं गांठे न पड़ें ध्यान रहे। सभी मसाले डालें और बेसन सेंकें। बेसन धीरे-धीरे लाल होने लगेगा। जब बेसन पूरी तरह से सिंक जाए तब गैस बंद करें।

प्याज के बेसन का स्वाद इसकी सिकाई पर निर्भर करता है। बढ़िया सिका हुआ प्याज का बेसन खा कर देखिए, हलवे से कम स्सवादिष्ट नहीं लगेगा।



मंगलवार, 8 जुलाई 2025

Anemia Diet एनीमिया आहार

सात्विक और पौष्टिक भोजन से उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त किया जा सकता है लेकिन यदि संतुलित आहार न लिया जाय तो शरीर में कई तत्वों की कमी हो जाती है, जिनमें एक तत्व है BLOOD या रक्त। रक्त मानव शरीर का एक आवश्यक भाग है। शरीर को स्वस्थ रखने व ऊर्जावान बनाये रखने के लिए रक्त का पर्याप्त मात्रा में होना आवश्यक है। 
रक्त में लोह तत्व की कमी से शरीर में रक्त की कमी हो जाती है जिसे एनीमिया कहते हैं। ऐसा जरूरी नहीं कि आप काजू-बादाम या अन्य महंगे पदार्थ खाएं, साधारण भोज्य पदार्थों से भी रक्त की पर्याप्त मात्रा शरीर में बन जाती है। पर जब हमारे भोजन में कुछ अनावश्यक वस्तुयें शामिल करके जरूरी तत्व छोड़ दिये जायें तो खून या रक्त की कमी यानि एनीमिया होने लगता है।

एनीमिया के लक्षण - 

एनीमिया के कारण कोई अंग विशेष नहीं बल्कि शरीर का सम्पूर्ण स्वास्थ्य प्रभावित होता है। एनीमिया में खून की कमी होना मुख्य कारण है और खून का एक मुख्य भाग होता है - हीमोग्लोबिन।
 हीमोग्लोबिन दो शब्दों से मिलकर बना है - हिम यानि लोहा और ग्लोबिन यानि प्रोटिन। नाखून, हथेली, चेहरे व आंखों में सामान्य रंगत के बजाय उनमें पीलापन, शरीर में थकावट, ज्यादा पसीना आना और पैरों में सूजन एनीमिया के लक्षण हो सकते हैं। 

एनीमिया का इलाज - 


खानपान में थोड़ी-सी सावधानी बरत कर एनीमिया से निजात पाई जा सकती है। एनीमिया में कैसा आहार लिया जाए, इस विषय में कुछ उपाय नीचे दिए जा रहे हैं। आप इन्हें अपनाकर एनीमिया को दूर कर सकते हैं।

1- यदि आप या परिवार का कोई सदस्य एनीमिया anemia  या रक्ताल्पता से ग्रस्त है तो अनार के पत्तों में इसका इलाज छुपा है। रोज एक छोटा चम्मच अनार के पत्तों का रस पीने से 15-20 दिन में चेहरे पर सुर्खी आने लगती है। 


2- अनार पीलिया रोग में भी गुणकारी है। 100 ml अनार के ताजे रस में  एक चम्मच पिसी मिश्री या ग्लूकोज़ मिला कर रोगी को देने से पीलिया जल्द ठीक हो जाता है।

3- पालक आयरन का अच्छा स्त्रोत है। पालक का अधिक सेवन एनीमिया दूर करने में मददगार होगा। पालक को पीस कर आटे में मिलाकर इसकी रोटी बनाकर भी खाई जा सकती है।

4- यदि विटामिन "सी" की कमी हो तो हम भोजन में जो आयरन अर्थात लोह तत्व लेंगे वह शरीर द्वारा अवशोषित नहीं हो पायेगा। इसलिए आयरन को अवशोषित करने के लिए शरीर को विटामिन "सी" की भरपूर आवश्यकता होती है। भोजन में हरी मिर्च, नींबू, आँवला, टमाटर आदि जोड़ कर इसकी पूर्ति की जा सकती है। 
5- चाय-काफी का सेवन कम करें।
6- चुकंदर beetroot में हीमोग्लोबिन बढ़ाने वाले तत्व काफी मात्रा में विद्यमान रहते हैं। चुकन्दर को सलाद का हिस्सा नियमित रूप से बनाइये या फिर इसका जूस बना कर पीजिये।



मंगलवार, 1 जुलाई 2025

पहाड़ी राजमा, सफेद राजमा केसे बनाते हैं ?

 


सफेद राजमा या पहाड़ी राजमा की फसल उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में  बोई जाती है। सफेद राजमा दिखने में काफी कुछ चवलें जैसा दिखता है। अंतर यह है कि यह आकार में चवलें के मुकाबले पतला,लंबा होता है। खाने में इसका स्वाद बिल्कुल चवलें की तरह होता है। इसकी सब्जी उसी तरह बनाई जाती है जैसे चवलें की।

सफेद राजमा की सब्जी बनाने की विधि:

सामग्री: 

1. सफेद राजमा 150 ग्राम

2. टमाटर एक

3. हरी मिर्च, धनिया

4. मसाले: नमक, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, धनिया पाउडर 

5. छौंक के लिए: राई, जीरा, हींग, एक चम्मच शहद तेल या घी 

विधि:

सफेद राजमा को धो कर पानी मेंआधा घंटे तक भिगने के लिए छोड़ दें। फिर कुकर में नमक, हल्दी डालकर चार सिटी आने तक पकाएं। एक बर्तन में तेल या घी डालकर गर्म करें‌। तेल-घई जब अच्छे से गर्म हो जाए तो राई डालकर तड़काएं। अब जीरा डालकर थोड़ी देर भूनें। फिर हींग डालें अब  बारीक कटी हरी मिर्च डाल दें। फिर कटे टमाटर डालें और टमाटर गलने तक चम्मच से हिलाते रहें। नमक डालें। 

दो मिनट पश्चात कुकर में पके राजमा डालें। स्वाद के हिसाब से ऊपर लिखे सभी मसाले राजमा में मिलाएं। राजमा बहुत सुखे लग रहें हों तो आवश्यकता अनुसार गर्म पानी डालकर एकसार करें। पांच मिनट बाद गैस से नीचे उतार लें।कटा हरा धनिया डालें।

सफेद राजमा सर्व करने के लिए तैयार है।

नोट:- यदि आप लहसुन, प्याज पसंद करते हैं तो छौंक में इनका इस्तेमाल कर सकते हैं।



शुक्रवार, 6 जून 2025

मक्की के आटे की मसाला-टिक्की

 


 मक्की के आटे की रोटी तो आप बनाते ही होंगे,आज बनाइए मक्की के आटे की मसाला- टिक्की।

ये साइज में रोटी और पराठे से काफी छोटी होती है। वैसे इसकी कोई निश्चित साइज नहीं है, आप चाहें तो रोटी जितनी बड़ी टिक्की भी बना सकते हैं।

सामग्री ~ मक्की का आटा 250 ग्राम, नमक, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, जीरा, अजवाइन, हींग, हरी मिर्च,अदरक, हरा धनिया। सेंकने के लिए तेल।

विधि ~  हरी मिर्च,अदरक और धनिया को मिक्सर में पीस कर पेस्ट बना लें। जीरा और अजवाइन को खरल में दरदरा कूट लें। 

अब आटे में सारे मसाले मिला लें। फिर अजवाइन और जीरा व मिर्च,अदरक,धनिया का पेस्ट भी मिला दें। 

पानी से आटा गूंधें। आटे को दस मिनट ढंक कर रख दें।

छोटी छोटी लोई लेकर हथेली के बीच रख कर थेपें और टिक्की बनाएं। तवे पर तेल की सहायता से दोनों तरफ से लाल होने तक अच्छी सिंकाई करें। 

वैसे ये टिक्की अचार या किसी अन्य चीज के बिना ही बहुत स्वादिष्ट लगती है पर यदि आप प्याज खाते हैं तो कच्चे प्याज के साथ खायेंगे तो कहना ही क्या !!


अब आए में सारे मसाले



बुधवार, 14 मई 2025

अजवाइन के पत्तों के भजिये

 



घर में आसानी से उगाया जाने वाला पौधा है यह, अजवाइन। ज्यादातर लोग इसे और बीज वाले अजवाइन को एक ही  मानते है लेकिन अजवाइन के बीज और यह अजवाइन जिसमें किसी प्रकार के फल, फूल  या बीज नहीं आते है दोनों भिन्न हैं।
यहां जिस पौधे की बात हो रही है उसका वानस्पतिक नाम COLEUS AROMATICUS है जबकि बीज वाले अजवाइन को वानस्पतिक भाषा में TRACHYSPERMUM AMMI कहते हैं।

अजवाइन के पत्तों में बहुत सारे औषधीय गुण हैं। इसका पौधा आसानी से घर में गमलों में ही उगाया जा सकता है। आजकल बारिश का मौसम चल रहा है और अभी अजवाइन बहुत फल-फूल रहा है। बड़े-बड़े पत्तों से इसकी बेलें ढंकी है। बारिश में सर्दी-खांसी होना आम बात है। तो क्यों न अजवाइन के पत्तों के भजिये बनाये जाएं। जिससे मजेदार भजिये का आनंद उठाने के साथ ही सर्दी-खांसी से भी निजात मिलेगी।

सामग्री :- अजवाइन के पत्ते आवश्यकता अनुसार

              घोल बनाने के लिए बेसन

              नमक

            लाल मिर्च पावडर

           सूखा धनिया पावडर

          हींग।

बस। अजवाइन के भजिये में इन चीजों के अलावा किसी अन्य वस्तु की जरूरत नहीं है। आप चाहे तो हरी मिर्च,हरा धनिया और दूसरी सामग्री डाल सकते हैं।यह आपकी इच्छा पर निर्भर है। लेकिन अजवाइन के पत्तों का असली स्वाद लेने के लिए कम से कम मसाले इस्तेमाल करें।


विधि :- बेसन में उपरोक्त सभी मसाले मिला कर पानी से  भजिये बनाने का घोल तैयार करें। गैस चालू करके कढ़ाही में तेल डालकर रखें। तेल अच्छा गर्म हो जाये तो अजवाइन के पत्ते एक -एक करके बेसन के घोल में लपेट कर तेल में छोड़ते जाएं, ठीक वैसे ही जैसे गिलकी,आलू,पालक आदि के भजिये बनाते हैं। दोनों तरफ से अलट - पलट कर भजिये सुनहरे होने तक तलें। फिर तेल से निकालकर प्लेट में सर्व करें।


  


 

       

मंगलवार, 23 जुलाई 2024

ऋतु के अनुरूप भोजन करिये


 हम सब यह जानते हैं कि ऋतुएँ छः होती हैं। ऋतु बदलते ही  हमको अपने आहार में भी परिवर्तन करना जरूरी होता है तभी हम मौसमी बीमारियों से बच सकते हैं।तो आइए इस पोस्ट में हम जानते हैं कि कौनसी ऋतु में कैसा भोजन किया जाय जिससे शरीर को लाभ हो और ऋतु-जनित बीमारियां न हों।

सूर्य व चंद्रमा की गति के अनुसार पूरे वर्ष को दो आयन या भाग में विभाजित किया जा सकता है। पहला "उत्तरायण" और दूसरा "दक्षिणायन"। इन दोनों आयन के भी तीन -तीन उपभाग करने पर छः ऋतुएँ बनती हैं।

1. शिशिर (जनवरी - फरवरी)

2. वसंत (मार्च- अप्रेल)

3.ग्रीष्म (मई- जून)

4.वर्षा (जुलाई- अगस्त)

5. शरद ( सितंबर- अक्टूबर)

6. हेमंत (नवंबर - दिसंबर)

मौसम तीन प्रकार के होते हैं। सर्दी,गर्मी व बरसात। प्रकृति हम सब लोगों का बहुत ध्यान रखती है। हर ऋतु में स्वास्थ्य के अनुकूल खाने योग्य वस्तुएं ही बहुतायत में मिलती हैं। इसलिए हमें इन सबका ज्यादा मात्रा में उपयोग करना चाहिए।

आइये, देखते हैं, कौनसी ऋतु में क्या वस्तु सेवन करें ~


1. शिशिर (जनवरी- फरवरी) -

शिशिर ऋतु में दिन छोटे और रातें लंबी होती हैं। इस समय पीने के लिए गुनगुने पानी का प्रयोग करें। हरी सब्जियां सस्ती और आसानी से मिलती हैं। हरी सब्जियों मैथी, पत्तागोभी, पालक, बथुआ, मटर का सेवन अधिक करें। देसी घी के प्रयोग से त्वचा चिकनी और सुंदर बनी रहती है। इस ऋतु में कफ व सर्दी-जनित रोग अधिक होते हैं इसलिए खान-पान में गर्म मसालों की मात्रा बढ़ा दें।


2. वसंत (मार्च- अप्रेल) -

सभी ऋतुओं का राजा वसंत को कहा जाता है क्योंकि यह ऋतु बड़ी सुहानी होती है। लेकिन सर्दी-जुकाम और एलर्जी, दमा रोग का प्रकोप अधिक होता है। इसलिए इस ऋतु में घी का उपयोग कम कर देना चाहिए। पानी सामान्य ताप का पियें।


3. ग्रीष्म (मई- जून) -

ग्रीष्म ऋतु में सूरज भगवान अपने पूरे प्रभाव में रहते हैं। इस ऋतु में मानव शरीर में अक्सर पानी की कमी हो जाती है। कफ कमजोर पड़ जाता है व वायु की वृद्धि हो जाती है। गर्मी में मिलने वाले ककड़ी,तरबूज, आम, दही करेला का उपयोग करें। दोपहर के समय बाहर न घूमें। लू लगने पर कच्चे आम का पना व प्याज का सेवन करें।


4. वर्षा (जुलाई- अगस्त) -

यह ऋतु मनुष्य के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक होती है क्योंकि इस समय ठंडी हवा, दूषित पानी और धूप का अभाव अनेकों रोगों को उत्पन्न करते हैं। वायु में नमी अधिक होने से बैक्टीरिया शीघ्र पनपते हैं इसलिए पीने हेतु केवल उबले जल का उपयोग उत्तम है। पत्तेदार साग जैसे पालक, मैथी, पत्तागोभी और जमीकंद जैसे आलू, प्याज आदि का त्याग श्रेष्ठ है। अंकुरित मूंग-चने, लौकी, तोरई, टिंडा व गिलकी का उपयोग करें। 


5. शरद (सितंबर- अक्टूबर) -

शरद ऋतु में सब ओर हरियाली ही हरियाली नजर आती है। वातावरण में ठंडक आने लगती है। यह ऋतु पित्त-जनित विकारों को जन्म देती है। गर्म कपड़ों का प्रयोग शुरू कर दें। खट्टे व तीखे पदार्थों का सेवन न करें। आंवला, नारियल, खजूर, सूखे मेवे खाना प्रारंभ कर दें।


6. हेमंत (नवंबर - दिसंबर) -

हेमंत ऋतु शुरू होते ही ठंडी हवाएं चलने लगती हैं। रातें बड़ी व दिन छोटे होने लगते हैं। मौसम ठंडा होने लगता है। यह मौसम स्वास्थ्य की दृष्टि से सबसे बढ़िया मौसम माना जाता है। क्योंकि भूख बहुत लगती है और पाचन क्रिया तीव्र हो जाती है। जो कुछ भी खाएं, तुरंत हजम हो जाता है। दूध-घी  व सूखे मेवों का प्रयोग खुल कर करें।

ऊपर लिखे अनुसार आप अपना खान-पान रखेंगे तो बीमारी पास भी न आएगी।








बुधवार, 3 जुलाई 2024

सब्जियां कैसे संग्रहित करें ?

 साल भर उपयोग के लिए सब्जियां किस तरह सुरक्षित रूप से संग्रहित करें ?
 सब्जियां तो हम रोज ही इस्तेमाल करते हैं। बिना साग के भोजन की थाली पूर्ण नहीं होती है। सर्दियों में सब्जियां बाजार में प्रचुर मात्रा में आती हैं और सस्ती भी मिल जाती है। पर गर्मी में सब्जियां कम और महंगी मिलती है। हम सर्दियों में थोड़ी मेहनत करके गर्मी के लिए सब्जियां इकट्ठी करके रख सकते हैं। आइये देखें कुछ सब्जियां किस प्रकार से संग्रहित करके रख सकते हैं :->

सब्जियां सुखाने के लिए अच्छी किस्म की और ताजी सब्जियां ही लें। बहुत जल्दी खराब होने वाली सब्जियों में पत्तेदार सब्जी जैसे मैथी, पालक, चौलाई  मुख्य हैं। इनको वर्षभर संग्रहित करने के लिए पहले इन सब्जियों में से कचरा बीन कर अलग कर लें। सब्जियों का सड़ा-गला हिस्सा निकाल दें।अब साफ़ पानी से धो लें ताकि कंकर, धूल-मिट्टी निकल जाये। फिर पानी अच्छी तरह से निथार कर साफ़ कपड़े पर बिछा कर एक दिन धूप में सुखाएं जिससे इनका पानी सूख जाये। 
इसके बाद धूप से हटा कर छाया में तब तक सुखाएं जब तक पूरी तरह नमी ख़त्म न हो जाए। इसके बाद सूखी हुई पत्तेदार सब्जियां संग्रह योग्य हो जाती हैं। इनको प्लास्टिक के डब्बों में भर कर रखें। 
आलू की सब्जी या पराठें बनाते वक्त थोड़ी सी सूखी मैथी या पालक ले कर बारीक मसल लें और आलू या पराठों के आटे में मिला लें। देखिये स्वाद भी बढ़ गया, भोजन की पौष्टिकता भी बढ़ गई और भोजन का रंग-रूप भी बढ़िया हो गया।

सब्जी की सहायक सामग्री जैसे धनिया, हरी मिर्च, टमाटर, प्याज, लहसुन भी आप वर्ष भर सूखा कर रख सकते हैं। 
कोई भी सब्जी आप सुखाएं तो ध्यान रहे कि बर्तन जैसे थाली, कटोरे या भगोने का उपयोग न करें क्योंकि ये पानी नहीं सोख सकते हैं इससे संग्रहित की जाने वाली वस्तुएं सूखने में बहुत समय लेंगी और उनमें बदबू आने की संभावना रहती है इसलिए हमेशा सब्जियां सूती कपड़े पर या सफेद प्लेन पेपर पर सूखाएं। इससे सब्जियां जल्दी सूखेंगी और बिल्कुल अपने वास्तविक रंग-रूप में रहेंगी।

आलू,प्याज और टमाटर जैसी सब्जियां आपको वर्ष भर संग्रहित करनी हो तो आलू के तो आप चिप्स बना कर साल भर उपयोग करते ही होंगे। प्याज और टमाटर सूखाने के लिए इन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। टमाटर के बीच के हिस्से में पानी और बीज होते हैं। यह भाग हटा कर  फिर इन्हें धूप में सुखाएं।

सब्जियां सर्दी यानि नवम्बर से लेकर फरवरी तक काफी मात्रा में और सस्ती मिल जाती हैं। आप उन्हीं दिनों में ज्यादा मात्रा में सब्जी खरीद कर उन्हें स्टोर कर सकती हैं। लेकिन संग्रहित सब्जियां जहां तक हो सके बारिश शुरू होने से पहले उपयोग कर लेनी चाहिए। बारिश शुरू होने पर संग्रहित सब्जियां खराब होने लगती हैं।