बाजार में सब्जी खरीदने निकलो तो सब्जी बेचने वालों के पास तरह-तरह की सब्जियां सजी रहती हैं। कोई-कोई सब्जी तो इतनी बढ़िया ओर सुंदर होती है कि मन करता है,बस भाव-ताव कुछ न करें और फ़ौरन घर ले जाएं।
ऐसे ही आजकल बाजार में सब्जी-फल इतने आकर्षक रंग-रूप में आने लगे हैं कि मुंह से निकल पड़ता है : वाह ! क्या क्या बात है ?
इसी तरह मार्केट में आजकल गिलकी अत्यधिक मात्रा में आ रही है।यह बात अलग है कि इसके दाम कम नहीं हो रहे हैं। और गिलकी भी देखते ही खरीदने की इच्छा हो उठती है।टोकरी में एक जैसी बराबर साइज की,चमकीली,पतली-पतली गिलकी देख कर कौन गृहिणी नहीं रिझेगी। लेकिन इनके इस आकर्षक रंग-रूप पर आप मत मोहित होइए। कृषि वैज्ञानिकों ने नए युग में जैसे क्रांति ला दी है।केमिकल के प्रयोग से आज हर खाद्य वस्तु की पैदावार इतनी ज्यादा हो रही है कि आबादी बढ़ने के उपरांत भी आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। इन केमिकल के द्वारा पैदावार जहां ज्यादा होती है, वस्तु अधिक सुंदर व आकर्षक दिखती हैं,जिससे बाजार में किसान को उसके अच्छे दाम मिल जाते हैं। पर यही केमिकल मनुष्य के शरीर में जा कर बीमारी को जन्म देंगे,ये तो एक साधारण इंसान भी समझ सकता है।
ये जो चमकदार,गहरी- हरी,पतली-पतली गिलकी आपको दिख रही है ना,इसमें वो स्वाद नहीं है जो कम चमकदार,छोटी-बड़ी,मोटी-पतली गिलकी में होता है। आपको विश्वास न हो तो दोनों तरह की गिलकी की सब्जी बना कर चखिए। फर्क मालूम हो जाएगा। इसलिए आज से सामान्य, मोटी-पतली छोटी-बड़ी गिलकी खा कर अनावश्यक बीमारी से बचिए।