मंगलवार, 24 मार्च 2020

साबूदाना खिचड़ी Sabudana Khichdi

साबूदाना खिचड़ी  सबकी मनपसन्द डिश है। घर में किसी का व्रत हो तो बाकी लोग भी साबूदाने की खिचड़ी खाये बगैर नहीं मानते। तो आईये आज साबूदाना खिचड़ी बनाई जाए।

आवश्यक सामग्री : साबूदाना 100 ग्राम, आलू उबले 150 ग्राम, मूंगफली के सिके दाने 60 ग्राम, सेंधा नमक स्वाद के हिसाब से, लाल मिर्च पाउडर, जीरा थोड़ा सा, हरी मिर्च, हरा धनिया बारीक कटा हुआ, बघार के लिए खाने का तेल या घी।

विधि : साबूदाना को धो कर दो-तीन घंटे पानी में भीगने के लिए छोड़ दें जिससे वो फूल जाएं। इसके बाद सारा पानी निथार कर साबूदाने को अलग बर्तन में निकाल लें। सिंके हुए मूंगफली के दानों को दरदरा पीस लें। अब इन दानों को भीगे हुए साबूदाना में मिला दें और किसी प्लेट से आधा घंटे के लिए ढंक कर रख दें।
 कढ़ाही में  तेल या घी जो भी आपको पसंद हो, डाल कर गैस की आंच पर रखें। तेल-घी गरम होने पर उसमें जीरा डालें। जीरा सिकने के बाद कटी हरी मिर्च डालें। फिर उबले कटे आलू डाल कर लाल मिर्च, सेंधा नमक मिला कर अच्छे से चलाएं। दो मिनट बाद भिगोए हुए साबूदाने और  मूंगफली दाने डालें। सब चीजों को चम्मच से हिलाते हुए एकसार करें और थोड़ी देर के लिए ढक्कन ढंक कर आंच पर भाप में पकने दें। थोड़ी देर बाद ढक्कन हटा कर कटा हरा धनिया और नींबू का रस मिला दें। खिचड़ी तैयार हो गई।

नोट~ 1.यदि आप व्रत में हरी मिर्च व धनिया न खाते हों तो खिचड़ी इनके बिना ही बनाएं। 
2.  व्रत की साबूदाने की खिचड़ी में शक्कर नहीं डाली जाती है लेकिन आप ऐसे ही शौकिया बना रहे हैं तो हल्की शक्कर खिचड़ी के स्वाद को हज़ार गुना बढ़ा देगी। 

बुधवार, 11 मार्च 2020

किचन गार्डन में अजवाइन उगाएं

आपका किचन गार्डन है तो उसमें एलोवेरा, मीठी नीम, पुदीना के अलावा अजवाइन जरूर लगाएं। यह पौधा सामान्य अजवाइन जिसके बीज हम लोग पूरी-पराठों में डालते हैं,से अलग है। इस पौधे पर किसी तरह के फूल नहीं आते हैं। इसके पत्ते गहरे हरे, कंगुरेदार, मोटे व रोयों वाले होते हैं। पत्तों में एक विशेष प्रकार की तेज सुगंध आती है। तासीर में अजवाइन के पत्ते गरम और स्वाद में ये तीखे-चरपरे होते हैं।
इसको आप किचन गार्डन या गमले में आसानी से उगा सकते हैं। अजवाइन के पौधे पर बारह महीने पत्ते उगते रहते हैं लेकिन बारिश में इसमें बहुत ज्यादा ग्रोथ होती है। अजवाइन के पत्ते खांसी,सर्दी-जुकाम ठीक करने में उपयोगी हैं। आयुर्वेद के अनुसार इन पत्तों का काढ़ा बना कर पीने से बुखार,सर्दी जुकाम में लाभ होता है।
सर्दी-जुकाम व खांसी होने पर कुछ दिनों तक अजवाइन के पत्ते चबाने से आराम मिलता है। खांसी होने पर पानी में इसके पत्ते उबाल कर छान लें और इस पानी को थोड़ी-थोड़ी देर में पियें।
बारिश के दिनों में सभी को सर्दी-खांसी, बुखार जैसी आम तकलीफें परेशान करती हैं और तभी अजवाइन के पौधे में खासी बढ़वार देखने को मिलती है। 
पकोड़े - बारिश के मौसम में वैसे भी पकोड़े खाना सभी को पसंद है तब इन पत्तों के पकोड़े बना कर देखिए कितने स्वादिष्ट बनते हैं और आप महसूस करेंगे कि बारिशजनित बीमारियां इन पकोड़ों के खाने से घर से किस तरह भाग जाती है !!