मंगलवार, 23 जुलाई 2024

ऋतु के अनुरूप भोजन करिये


 हम सब यह जानते हैं कि ऋतुएँ छः होती हैं। ऋतु बदलते ही  हमको अपने आहार में भी परिवर्तन करना जरूरी होता है तभी हम मौसमी बीमारियों से बच सकते हैं।तो आइए इस पोस्ट में हम जानते हैं कि कौनसी ऋतु में कैसा भोजन किया जाय जिससे शरीर को लाभ हो और ऋतु-जनित बीमारियां न हों।

सूर्य व चंद्रमा की गति के अनुसार पूरे वर्ष को दो आयन या भाग में विभाजित किया जा सकता है। पहला "उत्तरायण" और दूसरा "दक्षिणायन"। इन दोनों आयन के भी तीन -तीन उपभाग करने पर छः ऋतुएँ बनती हैं।

1. शिशिर (जनवरी - फरवरी)

2. वसंत (मार्च- अप्रेल)

3.ग्रीष्म (मई- जून)

4.वर्षा (जुलाई- अगस्त)

5. शरद ( सितंबर- अक्टूबर)

6. हेमंत (नवंबर - दिसंबर)

मौसम तीन प्रकार के होते हैं। सर्दी,गर्मी व बरसात। प्रकृति हम सब लोगों का बहुत ध्यान रखती है। हर ऋतु में स्वास्थ्य के अनुकूल खाने योग्य वस्तुएं ही बहुतायत में मिलती हैं। इसलिए हमें इन सबका ज्यादा मात्रा में उपयोग करना चाहिए।

आइये, देखते हैं, कौनसी ऋतु में क्या वस्तु सेवन करें ~


1. शिशिर (जनवरी- फरवरी) -

शिशिर ऋतु में दिन छोटे और रातें लंबी होती हैं। इस समय पीने के लिए गुनगुने पानी का प्रयोग करें। हरी सब्जियां सस्ती और आसानी से मिलती हैं। हरी सब्जियों मैथी, पत्तागोभी, पालक, बथुआ, मटर का सेवन अधिक करें। देसी घी के प्रयोग से त्वचा चिकनी और सुंदर बनी रहती है। इस ऋतु में कफ व सर्दी-जनित रोग अधिक होते हैं इसलिए खान-पान में गर्म मसालों की मात्रा बढ़ा दें।


2. वसंत (मार्च- अप्रेल) -

सभी ऋतुओं का राजा वसंत को कहा जाता है क्योंकि यह ऋतु बड़ी सुहानी होती है। लेकिन सर्दी-जुकाम और एलर्जी, दमा रोग का प्रकोप अधिक होता है। इसलिए इस ऋतु में घी का उपयोग कम कर देना चाहिए। पानी सामान्य ताप का पियें।


3. ग्रीष्म (मई- जून) -

ग्रीष्म ऋतु में सूरज भगवान अपने पूरे प्रभाव में रहते हैं। इस ऋतु में मानव शरीर में अक्सर पानी की कमी हो जाती है। कफ कमजोर पड़ जाता है व वायु की वृद्धि हो जाती है। गर्मी में मिलने वाले ककड़ी,तरबूज, आम, दही करेला का उपयोग करें। दोपहर के समय बाहर न घूमें। लू लगने पर कच्चे आम का पना व प्याज का सेवन करें।


4. वर्षा (जुलाई- अगस्त) -

यह ऋतु मनुष्य के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक होती है क्योंकि इस समय ठंडी हवा, दूषित पानी और धूप का अभाव अनेकों रोगों को उत्पन्न करते हैं। वायु में नमी अधिक होने से बैक्टीरिया शीघ्र पनपते हैं इसलिए पीने हेतु केवल उबले जल का उपयोग उत्तम है। पत्तेदार साग जैसे पालक, मैथी, पत्तागोभी और जमीकंद जैसे आलू, प्याज आदि का त्याग श्रेष्ठ है। अंकुरित मूंग-चने, लौकी, तोरई, टिंडा व गिलकी का उपयोग करें। 


5. शरद (सितंबर- अक्टूबर) -

शरद ऋतु में सब ओर हरियाली ही हरियाली नजर आती है। वातावरण में ठंडक आने लगती है। यह ऋतु पित्त-जनित विकारों को जन्म देती है। गर्म कपड़ों का प्रयोग शुरू कर दें। खट्टे व तीखे पदार्थों का सेवन न करें। आंवला, नारियल, खजूर, सूखे मेवे खाना प्रारंभ कर दें।


6. हेमंत (नवंबर - दिसंबर) -

हेमंत ऋतु शुरू होते ही ठंडी हवाएं चलने लगती हैं। रातें बड़ी व दिन छोटे होने लगते हैं। मौसम ठंडा होने लगता है। यह मौसम स्वास्थ्य की दृष्टि से सबसे बढ़िया मौसम माना जाता है। क्योंकि भूख बहुत लगती है और पाचन क्रिया तीव्र हो जाती है। जो कुछ भी खाएं, तुरंत हजम हो जाता है। दूध-घी  व सूखे मेवों का प्रयोग खुल कर करें।

ऊपर लिखे अनुसार आप अपना खान-पान रखेंगे तो बीमारी पास भी न आएगी।








बुधवार, 3 जुलाई 2024

सब्जियां कैसे संग्रहित करें ?

 साल भर उपयोग के लिए सब्जियां किस तरह सुरक्षित रूप से संग्रहित करें ?
 सब्जियां तो हम रोज ही इस्तेमाल करते हैं। बिना साग के भोजन की थाली पूर्ण नहीं होती है। सर्दियों में सब्जियां बाजार में प्रचुर मात्रा में आती हैं और सस्ती भी मिल जाती है। पर गर्मी में सब्जियां कम और महंगी मिलती है। हम सर्दियों में थोड़ी मेहनत करके गर्मी के लिए सब्जियां इकट्ठी करके रख सकते हैं। आइये देखें कुछ सब्जियां किस प्रकार से संग्रहित करके रख सकते हैं :->

सब्जियां सुखाने के लिए अच्छी किस्म की और ताजी सब्जियां ही लें। बहुत जल्दी खराब होने वाली सब्जियों में पत्तेदार सब्जी जैसे मैथी, पालक, चौलाई  मुख्य हैं। इनको वर्षभर संग्रहित करने के लिए पहले इन सब्जियों में से कचरा बीन कर अलग कर लें। सब्जियों का सड़ा-गला हिस्सा निकाल दें।अब साफ़ पानी से धो लें ताकि कंकर, धूल-मिट्टी निकल जाये। फिर पानी अच्छी तरह से निथार कर साफ़ कपड़े पर बिछा कर एक दिन धूप में सुखाएं जिससे इनका पानी सूख जाये। 
इसके बाद धूप से हटा कर छाया में तब तक सुखाएं जब तक पूरी तरह नमी ख़त्म न हो जाए। इसके बाद सूखी हुई पत्तेदार सब्जियां संग्रह योग्य हो जाती हैं। इनको प्लास्टिक के डब्बों में भर कर रखें। 
आलू की सब्जी या पराठें बनाते वक्त थोड़ी सी सूखी मैथी या पालक ले कर बारीक मसल लें और आलू या पराठों के आटे में मिला लें। देखिये स्वाद भी बढ़ गया, भोजन की पौष्टिकता भी बढ़ गई और भोजन का रंग-रूप भी बढ़िया हो गया।

सब्जी की सहायक सामग्री जैसे धनिया, हरी मिर्च, टमाटर, प्याज, लहसुन भी आप वर्ष भर सूखा कर रख सकते हैं। 
कोई भी सब्जी आप सुखाएं तो ध्यान रहे कि बर्तन जैसे थाली, कटोरे या भगोने का उपयोग न करें क्योंकि ये पानी नहीं सोख सकते हैं इससे संग्रहित की जाने वाली वस्तुएं सूखने में बहुत समय लेंगी और उनमें बदबू आने की संभावना रहती है इसलिए हमेशा सब्जियां सूती कपड़े पर या सफेद प्लेन पेपर पर सूखाएं। इससे सब्जियां जल्दी सूखेंगी और बिल्कुल अपने वास्तविक रंग-रूप में रहेंगी।

आलू,प्याज और टमाटर जैसी सब्जियां आपको वर्ष भर संग्रहित करनी हो तो आलू के तो आप चिप्स बना कर साल भर उपयोग करते ही होंगे। प्याज और टमाटर सूखाने के लिए इन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। टमाटर के बीच के हिस्से में पानी और बीज होते हैं। यह भाग हटा कर  फिर इन्हें धूप में सुखाएं।

सब्जियां सर्दी यानि नवम्बर से लेकर फरवरी तक काफी मात्रा में और सस्ती मिल जाती हैं। आप उन्हीं दिनों में ज्यादा मात्रा में सब्जी खरीद कर उन्हें स्टोर कर सकती हैं। लेकिन संग्रहित सब्जियां जहां तक हो सके बारिश शुरू होने से पहले उपयोग कर लेनी चाहिए। बारिश शुरू होने पर संग्रहित सब्जियां खराब होने लगती हैं। 

शनिवार, 15 जून 2024

क्या नमक के पानी का पौंछा लगाना सही है?

 बहनों, मैने कई टूट्यूब चैनल्स, न्यूजपेपर्स और अन्य सोशल मीडिया पर कई बार देखा-पढ़ा है कि घर के फर्श पर पौंछा लगाते समय पानी में खाने का नमक डालने से फर्श बैक्टीरिया-रहित, अधिक चमकीला और साफ दिखता है। 

मेरा यह मानना है कि ऐसा करने से न तो फर्श साफ होता है न बैक्टीरिया खत्म होते हैं। बल्कि ऐसा करने से उल्टे आपको कई तरह के नुकसान हो सकते हैं।

यही नमक जब आप घर में चलते-फिरते है, तो आपके पैरों में लगेगा। जिससे पैरों में चिपचिपाहट महसूस होती है और पैरों की कोमल त्वचा को हानि हो सकती है।साथ ही यदि त्वचा में कहीं कट लगा हो तो उस पर नमक लगने से जलन होगी।

नमक एक अत्यंत तीव्र रसायनिक लवण है। इसका प्रयोग फर्श पर करने से फर्श धीरे-धीरे खुरदुरा हो जाता है।

हमारे पुराणों में नमक को अत्यधिक सम्मानजनक स्थान दिया गया है। इन ग्रंथों में वर्णित है कि नमक जमीन पर बिखरने से पाप के भागी बनते हैं। पुराने जमाने में नमक यदि धरती पर गिर जाता था तो इसे एक अपशगुन माना जाता था।

इसलिए भविष्य में कभी भी पौंछा लगाने में नमक का प्रयोग न करें।