हम सब यह जानते हैं कि ऋतुएँ छः होती हैं। ऋतु बदलते ही हमको अपने आहार में भी परिवर्तन करना जरूरी होता है तभी हम मौसमी बीमारियों से बच सकते हैं।तो आइए इस पोस्ट में हम जानते हैं कि कौनसी ऋतु में कैसा भोजन किया जाय जिससे शरीर को लाभ हो और ऋतु-जनित बीमारियां न हों।
सूर्य व चंद्रमा की गति के अनुसार पूरे वर्ष को दो आयन या भाग में विभाजित किया जा सकता है। पहला "उत्तरायण" और दूसरा "दक्षिणायन"। इन दोनों आयन के भी तीन -तीन उपभाग करने पर छः ऋतुएँ बनती हैं।
1. शिशिर (जनवरी - फरवरी)
2. वसंत (मार्च- अप्रेल)
3.ग्रीष्म (मई- जून)
4.वर्षा (जुलाई- अगस्त)
5. शरद ( सितंबर- अक्टूबर)
6. हेमंत (नवंबर - दिसंबर)
मौसम तीन प्रकार के होते हैं। सर्दी,गर्मी व बरसात। प्रकृति हम सब लोगों का बहुत ध्यान रखती है। हर ऋतु में स्वास्थ्य के अनुकूल खाने योग्य वस्तुएं ही बहुतायत में मिलती हैं। इसलिए हमें इन सबका ज्यादा मात्रा में उपयोग करना चाहिए।
आइये, देखते हैं, कौनसी ऋतु में क्या वस्तु सेवन करें ~
1. शिशिर (जनवरी- फरवरी) -
शिशिर ऋतु में दिन छोटे और रातें लंबी होती हैं। इस समय पीने के लिए गुनगुने पानी का प्रयोग करें। हरी सब्जियां सस्ती और आसानी से मिलती हैं। हरी सब्जियों मैथी, पत्तागोभी, पालक, बथुआ, मटर का सेवन अधिक करें। देसी घी के प्रयोग से त्वचा चिकनी और सुंदर बनी रहती है। इस ऋतु में कफ व सर्दी-जनित रोग अधिक होते हैं इसलिए खान-पान में गर्म मसालों की मात्रा बढ़ा दें।
2. वसंत (मार्च- अप्रेल) -
सभी ऋतुओं का राजा वसंत को कहा जाता है क्योंकि यह ऋतु बड़ी सुहानी होती है। लेकिन सर्दी-जुकाम और एलर्जी, दमा रोग का प्रकोप अधिक होता है। इसलिए इस ऋतु में घी का उपयोग कम कर देना चाहिए। पानी सामान्य ताप का पियें।
3. ग्रीष्म (मई- जून) -
ग्रीष्म ऋतु में सूरज भगवान अपने पूरे प्रभाव में रहते हैं। इस ऋतु में मानव शरीर में अक्सर पानी की कमी हो जाती है। कफ कमजोर पड़ जाता है व वायु की वृद्धि हो जाती है। गर्मी में मिलने वाले ककड़ी,तरबूज, आम, दही करेला का उपयोग करें। दोपहर के समय बाहर न घूमें। लू लगने पर कच्चे आम का पना व प्याज का सेवन करें।
4. वर्षा (जुलाई- अगस्त) -
यह ऋतु मनुष्य के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक होती है क्योंकि इस समय ठंडी हवा, दूषित पानी और धूप का अभाव अनेकों रोगों को उत्पन्न करते हैं। वायु में नमी अधिक होने से बैक्टीरिया शीघ्र पनपते हैं इसलिए पीने हेतु केवल उबले जल का उपयोग उत्तम है। पत्तेदार साग जैसे पालक, मैथी, पत्तागोभी और जमीकंद जैसे आलू, प्याज आदि का त्याग श्रेष्ठ है। अंकुरित मूंग-चने, लौकी, तोरई, टिंडा व गिलकी का उपयोग करें।
5. शरद (सितंबर- अक्टूबर) -
शरद ऋतु में सब ओर हरियाली ही हरियाली नजर आती है। वातावरण में ठंडक आने लगती है। यह ऋतु पित्त-जनित विकारों को जन्म देती है। गर्म कपड़ों का प्रयोग शुरू कर दें। खट्टे व तीखे पदार्थों का सेवन न करें। आंवला, नारियल, खजूर, सूखे मेवे खाना प्रारंभ कर दें।
6. हेमंत (नवंबर - दिसंबर) -
हेमंत ऋतु शुरू होते ही ठंडी हवाएं चलने लगती हैं। रातें बड़ी व दिन छोटे होने लगते हैं। मौसम ठंडा होने लगता है। यह मौसम स्वास्थ्य की दृष्टि से सबसे बढ़िया मौसम माना जाता है। क्योंकि भूख बहुत लगती है और पाचन क्रिया तीव्र हो जाती है। जो कुछ भी खाएं, तुरंत हजम हो जाता है। दूध-घी व सूखे मेवों का प्रयोग खुल कर करें।
ऊपर लिखे अनुसार आप अपना खान-पान रखेंगे तो बीमारी पास भी न आएगी।