शुक्रवार, 20 नवंबर 2020

भुट्टे का सूप Corn Soup कैसे बनाएं ?


भुट्टे यानि Corn का उपयोग हम ज्यादातर सेंक कर खाने, सब्जी, कचौरी या किस बनाने में करते हैं लेकिन आज हम आपको इसका सूप यानि Corn Soup बनाना सिखाते हैं। किसी भी सब्जी या फल का सूप बनाने से उस वस्तु के सारे गुण सुप में समा जाते हैं। साथ ही  सूप Soup सुपाच्य और स्वादिष्ट होने से इसे शौक से सेवन कर सकते हैं।


भुट्टे का सूप के लिए बनाने के लिए सामग्री - दो-तीन नरम व दूध युक्त भुट्टे, एक प्याज, थोड़ा सा बटर, 100 ml दूध, नमक और काली मिर्च।

विधि - भुट्टों को किस कर उनके दाने निकाल लें। कुकर में पानी डाल कर भुट्टे का किस पकाएं। दो सिटी आने के बाद उनको निकाल कर मिक्सर में चला कर सूप की छलनी से छान लें।
बर्तन में घी या बटर गर्म करके कटे प्याज तलें। फिर भुट्टे डाल दें । थोड़ा पानी डालें। 5 मिनट बाद दूध  डाल दें। जब पक जाए तो नमक और पिसी काली मिर्च मिलाएं। यह सूप बच्चों- बड़ों और बुजुर्गों सब के लिए अत्यंत पौष्टिक है,बना कर अवश्य देखिए।

बुधवार, 11 नवंबर 2020

बादाम कब कैसे और कितनी खानी चाहिए ?


बादाम के बारे में सभी जानते हैं कि यह दिमागी ताकत के लिए खाई जाती है। बादाम प्रोटीन का भी एक बहुत अच्छा स्त्रोत है। इस कारण से यह बढ़ते बच्चों के लिए बहुत लाभकारी है। इसके अलावा बादाम में कैल्शियम, मैग्नेशियम, विटामिन ई और आयरन काफी मात्रा में पाया जाता है। बादाम मधुमेह के रोगियों के लिए एक बढ़िया आहार है। क्योंकि बादाम ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद देती है। साथ ही इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा   बहुत कम होती है जो मधुमेह की एक वजह है। बादाम को इसके अद्भुत पौषक तत्वों से भरा होने के कारण "सुपर फूड" कहते हैं।
पर बादाम खाने के भी कुछ नियम हैं। उन नियमों का पालन करके ही बादाम सेवन करनी चाहिए। वरना उल्टा आपकी सेहत को नुकसान भी हो सकता है। देखें, बादाम सेवन करने के नियम -

1. बादाम पचने में भारी होती है। इसलिए इसको कम मात्रा में खाना ठीक रहता है। अन्यथा सुस्ती,मोटापा और कब्जियत जैसी शिकायत हो सकती है।

2. बादाम खाने का सबसे बढ़िया समय सुबह का ही है। क्योंकि उस समय शरीर रात भर के आराम के बाद एकदम स्वस्थ्य होता है। जिससे बादाम जल्दी हजम हो जाती है।

3. बादाम के छिलके बहुत मुश्किल से पचते हैं। इसलिए कच्ची बादाम नहीं खाना चाहिये। बादाम को रात भर पानी में भिगोएं। सवेरे छिलका निकाल कर खाएं।

4. बादाम और काली मिर्च का संयोग अत्यंत लाभप्रद माना जाता है। बादाम के साथ एक-दो साबुत काली मिर्च अवश्य चबाएं। बादाम दुगना फायदा देगी।

5. बादाम में विटामिन ई काफी मात्रा में होता है। विटामिन ई बालों और त्वचा के लिए लाभदायक है। 4-5 बादाम में करीब 0.6 मिलीग्राम विटामिन ई होता है। इससे ज्यादा मात्रा में विटामिन ई शरीर के लिये नुकसानदेह है।

6. बुजुर्ग व्यक्ति बादाम, मिश्री और कालीमिर्च को पीस कर चूर्ण बनवा लेवें। सुबह-रात को दूध के साथ इस चूर्ण का सेवन करें।

7. बादाम और मुनक्का का मेल भी इन दोनों के गुणों में कई गुणा वृद्धि करता है।

8. अगर बादाम को महीन पीसकर हल्के गुनगुने दूध के साथ लिया जाय तो इसके फायदे हज़ारों गुना बढ़ जाएंगे।

सोमवार, 19 अक्टूबर 2020

सिर्फ तीन चीजों से आटे के बिस्किट


 बिना ओवन बिना बेकिंग पावडर, बिना सोड़ा, बिना इस्ट, बिना सूजी-मैदा -आटे के बिस्किट बनाने की विधि

No Oven, No Baking powder, No Baking soda, No Yeast, No Suji, No Maida- aate ke biscuits recipe

बाजार से खरीदे गए बिस्किट्स के बजाय घर में बनाये बिस्किट्स सेहत के लिए सुरक्षित होते हैं। घर पर बनाये बिस्किट्स में आप अपने हिसाब से शक्कर की मात्रा घटा- बढ़ा कर टेस्ट के अनुसार बना सकते हैं। तो क्यों न बनाये जाएं आटे के बिस्किट्स।

आटे के बिस्किट बनाने के लिए हमें न तो ओवन चाहिए न ईस्ट,न बेंकिंग पाउडर और न ही बेकिंग सोड़ा। सिम्पल तरीके से बनाये गए ये बिस्किट महीनों खराब नहीं होंगे। आप कहीं घूमने बाहर जा रहे हों तो ये बिस्किट बनाकर अवश्य ले जाएं। सफर में हर समय इनका स्वाद सबका उत्साह बढ़ा देगा।

सामग्री :- गेंहू का आटा 100 ग्राम

          शुद्ध  घी 50 ग्राम

          पिसी शक्कर 50 ग्राम

         इलायची पिसी हुई जरा सी

          ठंडा दूध

         तलने के लिए तेल या घी

विधि :-घी और शक्कर के बुरे को मिलाकर अच्छे से फेंटें। जब शक्कर घुल जाए तो इस मिश्रण को 10 मिनट के लिए ढंक कर रख दें। 

अब मिश्रण में आटा और इलाइची पावडर डालकर दोबारा घोटें। बीच-बीच में थोड़ा थोड़ा दूध मिलाते जाएं और एक कड़ा dough बना लें।  dough नरम नहीं होना चाहिए वरना आपके बिस्किट तलने में बहुत समय लेंगे और कच्चे रह  जाएंगे।

 इस dough को 15 मिनट के लिए ढंक कर रख दें। अब dough के छोटे-छोटे लोए लेकर हथेली के बीच में दबाकर चौकोर बिस्किट बना लें। बिस्किट्स को चाकू  से गोद दें। कढ़ाही में तेल या घी डालकर गैस की आंच पर रखें। तेल गर्म होने पर इसमें एक एक कर बिस्किट्स डालें। आप देखेंगे कि बिस्किट्स फूलने लगे हैं। ये बिस्किट दोनों तरफ से लाल होने तक तल लें। आटे के ये बिस्किट्स बेहद क्रिस्पी बनते हैं।


मंगलवार, 8 सितंबर 2020

रसोईघर की चीजों को खराब होने से बचाएं

बरसात आने से पहले यदि रसोई के काम आने वाली वस्तुओं को सुरक्षित न रखा जाए तो वे सड़ जाती हैं और उनमें कीड़े लग जाते हैं। इसलिए आजकल गृहिणियां चीजों की साल-सम्हाल से बचने के लिए सीमित मात्रा में ही रसोई का सामान खरीदती हैं। यह ठीक भी है लेकिन इससे गृहिणी को एन वक्त पर दिक्कत भी आ सकती है। सफल गृहिणियां हमेशा अपने किचन में रोजमर्रा की सामग्री वर्ष भर के लिए स्टाक करके रखती है। लेकिन इनकी उचित रख-रखाव न हो तो ये चीजें खराब होने लगती हैं। बरसात का मौसम आते ही महिलाएं किचन सामग्री की सुरक्षा की चिंता करने लगती हैं।हम यहां आपको अनाज-दालें वगैरह सुरक्षित रखने के कुछ टिप्स बता रहे हैं :

1.सभी सामग्री को कस कर बन्द करके डब्बों में भरें। स्टोर रूम में नमी न रहती हो।
2. पिसी लाल मिर्च में खड़े नमक के ढेले रखें या फिर लौंग भी डाल कर रख सकते हैं ।
गेंहू को अच्छी तरह साफ करके स्टोर करें।उनमें यदि कोई गेंहू सड़ा या कीड़ा लगा होगा तो वह सारे गेंहू को बेकार कर देगा।
3. गेंहू में नीम के पत्ते और डंठल डालने से वे वर्ष भर खराब नहीं होंगे।
4. चावल को धूप में नहीं रखा जाता है।इससे वो टूट जाते हैं।चावल को लटों और  कीड़ों से बचाने हेतु उनमें बोरिक पाउडर मिलाएं।
5. दालों को सड़ने से बचाने के लिए पहले उन्हें अच्छी तरह धूप में सुखाएं फिर नीम की पत्तियां और डंठल रखें।
6.इमली को चिएँ निकाल कर स्टोर करें। ताजी इमली में थोड़ी लाल मिर्च,नमक और हींग डाल कर लड्डू बांध कर स्टोर करने से वह खराब नहीं होती।
7. शक्कर रखने की जगह पर पहले वहां अच्छे के जमीन पर DDT POWDER की परत बिछा दें जिससे चीटियां नहीं आ पाएंगी।



सोमवार, 7 सितंबर 2020

चंवले यानि लोबिया की सब्जी chawle ki sabji


चंवले  की सब्जी chawle ki sabji बनाने के लिये निम्न सामग्री चाहिए -
CHAWALE SABJI  RECIPE

सामग्री

1. चंवले 100 ग्राम

2. एक छोटी प्याज बारीक कटी 

3. लाल मिर्च पावडर एक छोटा चम्मच

4. हल्दी पावडर आधा छोटा चम्मच

5. सूखा धनिया पावडर आधा छोटा चम्मच

6. राई छोंक के लिए

7. जीरा थोड़ा सा

8. हींग जरा सी

9. दो बारीक कटी हरी मिर्च

10.ताजा हरे धनिये की पत्तियां

11. तीन चम्मच खाने का तेल

विधि

चंवले को पानी से धो लें और फिर एक घण्टे तक पानी में गलने के लिए छोड़ दें। अब इन चंवलों को कुकर में तीन सिटी आने तक पकाएं। 

कढ़ाही में तेल डालकर आंच पर रखें। तेल गरम होने पर राई डालें। जब राई तड़कना बन्द कर दे तो जीरा डालें। फिर प्याज डालकर भूरे होने तक पकायें। आखिरी में हरी मिर्च डालें। 

चंवलों को कुकर में से निकाल कर एक बाउल में डाल दें। चंवलों में हल्दी पावडर, लाल मिर्च पावडर, धनिया पावडर व नमक डालकर अच्छे से मिलाएं।

इन चंवलों को कढ़ाही में डालें और एकसार करें। जरूरत अनुसार पानी भी डालें और 5-7 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं। हरे धनिये की बारीक कटी पत्तियां ऊपर से डालें।

चंवले की सब्जी तैयार है। यह सब्जी छोले की जगह पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं। यह पूरी, परांठे के साथ बहुत अच्छी लगती है। उत्तर और मध्य भारत में विवाह समारोहों में अक्सर यह सब्जी बनाई जाती है और बहुत पसंद की जाती है।





शुक्रवार, 4 सितंबर 2020

मूंगफली की चटनी साउथ इंडियन स्टाइल में कैसे बनाएं


चटनी यदि भोजन की थाली में रखी हो तो थाली की शोभा कई गुना बढ़ जाती है। और यदि वह चटनी झटपट और घर मेें उपलब्ध चीजोंं से आसानी से बनाई जा सकती हो तो क्या बात है। ऐसी ही एक चटनी बनाने की विधि मैं आपको आज बताने जा रही हूूं। तो फटाफट पूूरी रेेसिपी पढ़िए और तुुुरंत बना कर वाहवााही पाइये।


सामग्री -  मूंगफली के दाने 50 ग्राम
              कड़ी पत्ते 10
              खड़ा धनिया थोड़ा सा
              सूखी लाल मिर्च
              इमली

 लाल मिर्च न हो तो ताजी  हरी मिर्च भी ले सकते हैं। इन सब को कढाही में डालकर सेंक लें। फिर इमाम दस्ते या ग्राइंडर में पिस लें। थोड़ा नमक और चीनी मिलाये। पानी मिला कर  थोड़ा पतला करें। कढाई में घी डालकर गरम करें। राई व जीरा का तड़का लगाएं और ये तड़का चटनी पर डाल दें। मिक्स करें। चटनी इज रेडी ☺☺


शुक्रवार, 17 जुलाई 2020

राजगीरे के आटे के परांठे

राजगीरा बहुत ज्यादा पौष्टिक और प्रोटीन युक्त आटा है। राजगीरे के आटे का उपयोग व्रत में किया जाता है लेकिन इसके व्यंजन इतने स्वादिष्ट होते हैं कि घर में सदस्य अक्सर इसकी रोटी,परांठे और पूरी खाने की फरमाइश करते रहते हैं।

तो पहले हम राजगीरे के बारे में बात करते हैं क्योंकि भारत के कुछ भागों में ये इतना पापुलर नहीं है,जितना उत्तर क्षेत्र में। राजगीरा को रामदाना के नाम से भी जाना जाता है। चौलाई की साग तो पूरे देश में बरसात के मौसम में मिलती है। चौलाई के बीज ही राजगीरा कहलाते हैं। इसका वानस्पतिक नाम AMARANTHUS है और अंग्रेजी में Amaranth कहते हैं। राजगीरे को शक्कर की चाशनी में लपेट कर इसके लड्डू बनाये जाते हैं जो बच्चों को बहुत पसंद आते हैं और उनके लिए ये प्रोटीन से भरपूर एक बहुत ही उत्तम आहार है।

तो आईये राजगीरे के आटे के परांठे बनाना सीखते हैं -

सामग्री :- राजगीरे का आटा, लाल मिर्च पावडर, सेंधा नमक, बारीक कटी हरी मिर्च, बारीक कटा हरा धनिया, जीरा। चाहें तो एक उबले आलू को मसल कर भी डाल दें। मसाले अपने स्वाद के अनुसार आप आटे में डालें।

विधि :- आटे में सारे मसाले और हरी मिर्च, धनिया डाल कर पानी से आटा गूंध लें। राजगीरे का आटा गेंहू के आटे के बनिस्बत मोटा और दरदरा होता है इसलिए गूंधने के बाद आटा गेंहू के आटे के समान नहीं होता है। गूंधने के बाद आटे को 15 मिनट के लिए ढंक कर रख दें।
आंच पर तवा गर्म होने के लिए रखें। आटे की मोटी लोई तोड़ कर चकले पर एक मोटा गोल परांठा बेलें। राजगीरे के आटे के परांठे बेलने में बहुत सावधानी रखें क्योंकि राजगीरे के आटे में थोड़ी सख्ती होती है। बेलते समय इसकी रोटी,परांठे टूट जाते हैं। परांठे धीरे-धीरे पलेथन की सहायता से बेलें। फिर इनको तवे पर देसी घी लगा कर दोनों तरफ से सेंकें।
राजगीरे के परांठे गरम-गरम ज्यादा टेस्टी लगते हैं। इनको टमाटर के सलाद या दही के साथ परोसें।

गुरुवार, 9 जुलाई 2020

बची हुई रोटी और सब्जी




 बची रोटी leftover chapati recipe
बची हुई रोटी से आपने खाकरे, पोहे व उपमा आदि जरूर बनाये होंगे। लेकिन मैं आज आपको यहां बची रोटी से ऐसा नाश्ता बनाना बता रही हूं जो न केवल खाने में स्वादिष्ट है बल्कि बनाने में बहुत सरल और हैल्थ के लिए पौष्टिक है। इसके लिए जरूरी सामग्री
और बनाने की विधि इस तरह है :-


जरूरी सामग्री - सूखी हुई रोटी, बारीक कटे प्याज, हरी मिर्च, हरा धनिया, जो भी सब्जियां आपके पास मौजूद हो जैसे मटर, लौकी, गिलकी, पालक,गौभी,आलू। बघार के लिए तेल, राई, जीरा और हींग, नमक, लाल मिर्च पावडर, हल्दी पावडर,  सूखा धनिया पावडर।

विधि :- बची सूखी हुई रोटी के छोटे-छोटे टुकड़े कर लें। सभी सब्जियों को साफ पानी से धो कर बारीक काट लें। सब्जियों में नमक,लाल मिर्च पावडर, धनिया पावडर, हल्दी पावडर डालकर मिला लें।

अब कढ़ाही में तेल डालकर गैस पर रखें। तेल गर्म हो जाये तो उसमें राई डालें। राई तड़कना बन्द कर दे तब जीरा और हींग डालें। फिर तुरन्त उसमें हरी मिर्च व प्याज डाल कर अच्छे से भूनें। जब प्याज थोड़े लाल हो जाये तो मसाले मिली हुई सब्जियां डाल दें। आवश्यक हो तो थोड़ा पानी डालें। सब्जियों को कढ़ाही में अच्छे से एकसार करके ढक्कन से ढंक दें। 7-8 मिनट बाद खोलकर देखें कि सब्जियां सीझ गई होंगी। अब बची रोटी के टुकड़े डालकर चम्मच से मिला दें। दोबारा ढक्कन से ढंक दें। 2-4 मिनट में रोटी के टुकड़े नर्म पड़ जाएंगे। अब ऊपर से हरे धनिए की बारीक कटी पत्तियां डाल दें। आपका पौष्टिक नाश्ता तैयार है।

शुक्रवार, 12 जून 2020

खट्टी चटनी बनाएं, सब दो रोटी ज्यादा खाएंगे

यहां हम आपको दही की खट्टी चटनी बनाना बता रहे हैं।इसे बनाएं, वास्तव में यह चटनी इतनी स्वादिष्ट है कि घर में बच्चों से लेकर बड़ों तक,सबको पसंद आएगी।

सामग्री - ताजा दही 25 ग्राम, एक बड़ा चम्मच लाल मिर्च, पिसा सूखा हरा धनिया एक छोटा चम्मच, नमक, लहसुन की 7-8 कलियां कुटी हुई, एक छोटा कटा प्याज,  बारीक कटा हरा धनिया, जीरा, हींग, तेल ।

विधि :- दही में लाल मिर्च, पिसा धनिया, नमक मिला कर अच्छे से फेंटे। कढ़ाही में तेल डाल कर आंच पर रखें।
 तेल गरम होने पर जीरा डाल कर तड़काएं। फिर हींग डालें। अब कुटी हुई लहसुन की कलियां डालें और लहसुन भूरी होने तक पकाएं। फिर कटे प्याज डालें और थोड़ी देर भूनें। आखिर में दही का मिश्रण डालें और चलाऐं, जब तक चटनी अच्छी तरह न पक जाए। बस चटनी तैयार हो गई।

मंगलवार, 24 मार्च 2020

साबूदाना खिचड़ी Sabudana Khichdi

साबूदाना खिचड़ी  सबकी मनपसन्द डिश है। घर में किसी का व्रत हो तो बाकी लोग भी साबूदाने की खिचड़ी खाये बगैर नहीं मानते। तो आईये आज साबूदाना खिचड़ी बनाई जाए।

आवश्यक सामग्री : साबूदाना 100 ग्राम, आलू उबले 150 ग्राम, मूंगफली के सिके दाने 60 ग्राम, सेंधा नमक स्वाद के हिसाब से, लाल मिर्च पाउडर, जीरा थोड़ा सा, हरी मिर्च, हरा धनिया बारीक कटा हुआ, बघार के लिए खाने का तेल या घी।

विधि : साबूदाना को धो कर दो-तीन घंटे पानी में भीगने के लिए छोड़ दें जिससे वो फूल जाएं। इसके बाद सारा पानी निथार कर साबूदाने को अलग बर्तन में निकाल लें। सिंके हुए मूंगफली के दानों को दरदरा पीस लें। अब इन दानों को भीगे हुए साबूदाना में मिला दें और किसी प्लेट से आधा घंटे के लिए ढंक कर रख दें।
 कढ़ाही में  तेल या घी जो भी आपको पसंद हो, डाल कर गैस की आंच पर रखें। तेल-घी गरम होने पर उसमें जीरा डालें। जीरा सिकने के बाद कटी हरी मिर्च डालें। फिर उबले कटे आलू डाल कर लाल मिर्च, सेंधा नमक मिला कर अच्छे से चलाएं। दो मिनट बाद भिगोए हुए साबूदाने और  मूंगफली दाने डालें। सब चीजों को चम्मच से हिलाते हुए एकसार करें और थोड़ी देर के लिए ढक्कन ढंक कर आंच पर भाप में पकने दें। थोड़ी देर बाद ढक्कन हटा कर कटा हरा धनिया और नींबू का रस मिला दें। खिचड़ी तैयार हो गई।

नोट~ 1.यदि आप व्रत में हरी मिर्च व धनिया न खाते हों तो खिचड़ी इनके बिना ही बनाएं। 
2.  व्रत की साबूदाने की खिचड़ी में शक्कर नहीं डाली जाती है लेकिन आप ऐसे ही शौकिया बना रहे हैं तो हल्की शक्कर खिचड़ी के स्वाद को हज़ार गुना बढ़ा देगी। 

बुधवार, 11 मार्च 2020

किचन गार्डन में अजवाइन उगाएं

आपका किचन गार्डन है तो उसमें एलोवेरा, मीठी नीम, पुदीना के अलावा अजवाइन जरूर लगाएं। यह पौधा सामान्य अजवाइन जिसके बीज हम लोग पूरी-पराठों में डालते हैं,से अलग है। इस पौधे पर किसी तरह के फूल नहीं आते हैं। इसके पत्ते गहरे हरे, कंगुरेदार, मोटे व रोयों वाले होते हैं। पत्तों में एक विशेष प्रकार की तेज सुगंध आती है। तासीर में अजवाइन के पत्ते गरम और स्वाद में ये तीखे-चरपरे होते हैं।
इसको आप किचन गार्डन या गमले में आसानी से उगा सकते हैं। अजवाइन के पौधे पर बारह महीने पत्ते उगते रहते हैं लेकिन बारिश में इसमें बहुत ज्यादा ग्रोथ होती है। अजवाइन के पत्ते खांसी,सर्दी-जुकाम ठीक करने में उपयोगी हैं। आयुर्वेद के अनुसार इन पत्तों का काढ़ा बना कर पीने से बुखार,सर्दी जुकाम में लाभ होता है।
सर्दी-जुकाम व खांसी होने पर कुछ दिनों तक अजवाइन के पत्ते चबाने से आराम मिलता है। खांसी होने पर पानी में इसके पत्ते उबाल कर छान लें और इस पानी को थोड़ी-थोड़ी देर में पियें।
बारिश के दिनों में सभी को सर्दी-खांसी, बुखार जैसी आम तकलीफें परेशान करती हैं और तभी अजवाइन के पौधे में खासी बढ़वार देखने को मिलती है। 
पकोड़े - बारिश के मौसम में वैसे भी पकोड़े खाना सभी को पसंद है तब इन पत्तों के पकोड़े बना कर देखिए कितने स्वादिष्ट बनते हैं और आप महसूस करेंगे कि बारिशजनित बीमारियां इन पकोड़ों के खाने से घर से किस तरह भाग जाती है !!


मंगलवार, 7 जनवरी 2020

दूध की खाली थैली का उपयोग

सभी के घरों में दूध तो आता ही है। यदि आप दूध मदर डेयरी या ऐसी ही किसी अच्छी डेयरी का दूध मंगवाते हैं तो दूध प्लास्टिक की थैली में आता है। हम दूध निकाल कर थैली कचरे में फेंक देते हैं लेकिन आपने नोट किया होगा कि ये milk bags दूध की थैली बहुत उच्च क्वालिटी के प्लास्टिक से बनाई जाती है और काफी मजबूत होती हैं। इन्हें यूंही फेंक देने से पर्यावरण को बेहद नुकसान होता है।अकेले भारत में ही रोज 20 करोड़ दूध की थैलियां इस्तेमाल के बाद फेंक दी जाती हैं। दूध की थैलियां मिट्टी में मिलने में 100 साल से भी ज्यादा समय लेती हैं।

   तो इन मिल्क बैग्स का उपयोग कैसे किया जाए। इस पोस्ट में मैं आपको बता रही हूं कि How to use  milk bags ? दूध की खाली थैलियों का उपयोग कैसे करें ? 


दूध की  खाली थैली का उपयोग करने से जहां आप  घर में काम आने लायक चीज बना सकते हैं वहीं इन मिल्क बैग्स से वातावरण प्रदूषित होने से भी बचेगा।
मैंने दूध की खाली थैली से पलंग पर बिस्तर बिछाने के लिए 4×6 की साईज की चटाई बनाई है। इसे आप भी आराम से बना सकते हैं। बस करना यह है कि दूध की खाली थैलियों को गर्म पानी में डिटर्जेंट डाल कर सारी चिकनाहट निकाल लें।  साफ थैलियों को सूखा लें। ऐसी ही साफ थैलियां इकट्ठी करती जाएं। जब कुछ थैलियां इकट्ठी हो जाएं तो पहले  एक- एक थैली को लंबाई में सुई- धागे या मशीन पर सील कर चार फीट लंबी एक लड़ी बना लें। इसी तरह थैलियों को सील कर चार फीट लंबी लड़ियाँ बना कर रखती जाएं।
जब काफी सारी लड़ियाँ बन जाए तो इनको खड़े आकार में आपसमें जोड़ती जाएं, जब तक कि 6 फ़ीट चौड़ाई न हो जाए। बस बन गई आपकी एक बहुत ही सुंदर और मजबूत दरी या चटाई।

मैथी के परांठे maithi paratha

मैथी के परांठे ऐसे बनाएं:-

1. गेंहू का आटा 100 ग्राम, बेसन 25 ग्राम, हरा धनिया बारीक कटा, अजवाईन, नमक,हल्दी,लाल मिर्च ,मैथी साफ,बारीक कटी हुई, एक छोटा प्याज, दो गांठअदरक व तीन हरी मिर्च ।

मैथी के परांठे बनाने की विधि:-
अदरक,प्याज,हरी मिर्च तीनों को खरल या इमाम दस्ते में कूटकर एक जान कर लें।अब परात में बाकी बची सामग्री अच्छे से मिला लें।पानी डाल कर रोटी से थोड़ा कड़ा आटा गूंथे।इस आटे को लगभग आधा घंटा ढंक कर रखें। फिर थोड़े मोटे परांठे बेल कर धीमी आंच पर तेल डालते हुए सेकें।गरमा-गर्म परांठे टमाटर के सलाद के साथ परोसें।

- आप चाहे तो आटा गूंथते समय तेल का मोयन डाल सकती हैं।